Article summary
Abstract
आधुनिक समाज में पुस्तकालय ज्ञान-संरक्षण, ज्ञान-प्रसारण, शिक्षा-संवर्धन एवं अनुसंधान-सहायता का एक जीवित केंद्र है। डिजिटल युग में सूचना-संप्रेषण प्रौद्योगिकी, नेटवर्क-आधारित समाज एवं वैश्वीकरण ने इसकी भूमिका को गतिशील, बहुआयामी एवं तकनीक-निर्भर बना दिया है। इस अध्ययन का उद्देश्य आधुनिक डिजिटल युग में पुस्तकालय की विविध भूमिकाओं (शिक्षा, अनुसंधान, सांस्कृतिक गतिविधियाँ, सूचना प्रसारण, धार्मिक-आध्यात्मिकता, मनोरंजन आदि) का विश्लेषण करना, साथ ही सूचना गोपनीयता, कॉपीराइट-अधिकार, सूचना-सुरक्षा एवं डिजिटल-नैतिकता जैसे मुद्दों एवं चुनौतियों पर प्रकाश डालना है। इसमें गुणात्मक-विश्लेषणात्मक विधि के माध्यम से विभिन्न द्वितीयक स्रोतों का प्रयोग किया गया है। अध्ययन के निष्कर्ष में पुस्तकालयों के लिए तकनीकी, नैतिक-कानूनी एवं संचालन-सुधारात्मक सुझाव प्रस्तुत किए गए हैं, जो विश्वसनीय, सुरक्षित एवं समावेशी ज्ञान-केंद्र के रूप में पुस्तकालय के भविष्य-विकास में सहायक हैं।
