Article summary
Abstract
यह शोध-पत्र प्रसिद्ध स्वतंत्र चित्रकार आर. एम. सिंह (राही महिंदर सिंह) की यथार्थवादी पोर्ट्रेट कला तथा
उनकी चयनित पसंदीदा पोर्ट्रेट पेंटिंग्स के विश्लेषण पर आधारित है। अध्ययन के लिए कलाकार से संबंधित उपलब्ध
साक्षात्कारात्मक सामग्री, कलाकार की कला-यात्रा तथा प्रस्तुत चार प्रमुख पोर्ट्रेट-जनरल जस्सा सिंह रामगढ़िया,
मिस्टर हेनरी आला, सरदार मुख्तार सिंह संधू, प्रोफेसर जी. एस. मान तथा गुरु हरकृष्ण महाराज जीकृको आधार
बनाया गया है। कलाकार की कला-यात्रा बचपन में रेलवे स्टेशन पर किए गए त्वरित स्केचों से प्रारंभ होकर आ
ैपचारिक कला शिक्षा, स्वतंत्र व्यावसायिक कार्य, समाचार-पत्रों के लिए चित्रांकन तथा अंततः संसद भवन, राष्ट्रपति
भवन और अंतरराष्ट्रीय निजी संग्रहों तक पहुँचती है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि आर. एम. सिंह के लिए पोर्ट्रेट
केवल चेहरे की बाहरी समानता स्थापित करने की प्रक्रिया नहीं है। वे ड्राइंग, प्रत्यक्ष अवलोकन, प्रकाश-छाया, त्वचा
के सूक्ष्म रंग, चेहरे की मॉडलिंग, वेशभूषा, परिवेश, ऐतिहासिक संदर्भ, मनोवैज्ञानिक व्यक्तित्व और सांस्कृतिक प्रतीकों
को एक साथ जोड़कर चित्र का निर्माण करते हैं। चयनित कृतियों में यथार्थवाद के अलग-अलग रूप दिखाई देते
हैंकृऐतिहासिक यथार्थवाद, मनोवैज्ञानिक यथार्थवाद, सांस्कृतिक यथार्थवाद तथा आध्यात्मिक यथार्थवाद। जनरल
जस्सा सिंह रामगढ़िया का पोर्ट्रेट वीरता और सामुदायिक स्मृति का प्रतिनिधित्व करता है; हेनरी आला का चित्र
वंश, पंजाब-फ्रांस संबंध और सांस्कृतिक विरासत को जोड़ता है; सरदार मुख्तार सिंह संधू का चित्र चेहरे की सूक्ष्म
मॉडलिंग और जीवन-सदृश उपस्थिति पर केंद्रित है; प्रोफेसर जी. एस. मान का पोर्ट्रेट शांत व्यक्तित्व तथा पंजाबी
सांस्कृतिक चेतना को व्यक्त करता है; जबकि गुरु हरकृष्ण महाराज जी का चित्र यथार्थवादी चित्रण को आध्यात्मिक
अनुभूति के साथ जोड़ता है। इस प्रकार आर. एम. सिंह की पोर्ट्रेट कला व्यक्ति की दृश्य पहचान से आगे बढ़कर
इतिहास, स्मृति, संस्कृति, आध्यात्मिकता और व्यक्तित्व का दृश्य आख्यान निर्मित करती है।
