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Abstract
राजगीर, मगध की प्राचीन राजधानी, बौद्ध धर्म के विकास और प्रसार में केंद्रीय भूमिका निभाता है। यहाँ बुद्ध के जीवन से संबंधित अनेक घटनाएँ घटी, गृद्धकूट पर्वत पर प्रवचन, प्रथम संघ परिषद का आयोजन, और अनेक विहारों व स्तूपों का निर्माण। इस शोध में साहित्यिक स्रोत, पुरातात्त्विक उत्खनन, अभिलेखीय प्रमाण और स्थल सर्वेक्षण का उपयोग किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि राजगीर न केवल धार्मिक केंद्र, बल्कि यह राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी प्रमुख स्थल रहा। बौद्ध ग्रंथों, जैन साहित्य और पुरातात्त्विक साक्ष्यों में इसका विस्तृत वर्णन मिलता है। बुद्ध के समय में यहाँ बिंबिसार और अजातशत्रु का शासन था। रामायण, महाभारत, पुराण सहित कई प्राचीन हिन्दू ग्रंथों में राजगीर का उल्लेख किया गया है। जैन और बुद्ध धर्म के संस्थापक, महावीर और बुद्ध ने भी अपने जीवन के अधिकांश समय यहीं व्यतित किए थे।
