Article summary
Abstract
यह शोध-पत्र भारतीय शिक्षा प्रणाली पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के प्रभाव और इसके क्रियान्वयन की चुनौतियों का समेकित आकलन प्रस्तुत करता है। अध्ययन दर्शाता है कि नीति का केन्द्रीय बल 5+3+3+4 ढाँचे, मातृभाषा-आधारित आरंभिक साक्षरता-संख्या ज्ञान, समग्र व दक्षताधारित पाठ्यचर्या, और उच्च शिक्षा में लचीलापन, अनुसंधान तथा बहु-विषयकता पर है। डिजिटल शिक्षण, ओपन/ऑनलाइन पाठ्यक्रम, और मिश्रित पद्धतियों ने पहुँच, वैयक्तिकरण और आकलन के नए मार्ग खोले हैं; साथ ही सतत व्यावसायिक विकास, मेंटरिंग और नई चयन/मूल्यांकन मानकों ने शिक्षक-तैयारी को केंद्र में रखा है। समावेशिता के आयामों वंचित समूह, विशेष आवश्यकताओं वाले विद्यार्थियों, और लैंगिक समानता में लक्षित समर्थन, छात्रवृत्तियाँ, सहायक प्रौद्योगिकी और स्थानीय भाषिक संसाधन नीति की प्रासंगिकता बढ़ाते हैं। संस्थागत स्तर पर स्वायत्तता, शासन-सुधार और गुणवत्ता आश्वासन तंत्र नवाचार को प्रोत्साहित करते हैं। तथापि, क्रियान्वयन में आर्थिक सीमाएँ , संरचनात्मक बाधाएँ (अवसंरचना, डिवाइस/कनेक्टिविटी, डेटा प्रणालियाँ), मानवीय संसाधन अंतर, तथा सामाजिक-सांस्कृतिक अवरोध नीति-लाभों के सम्यक् प्रसार को धीमा करते हैं। अध्ययन सुझाता है कि राज्य-विशिष्ट रोडमैप, परिणाम-आधारित वित्त, सार्वजनिकदृनिजी भागीदारी, जिला-स्तर डेटा-इंटेलिजेंस, और समुदाय/उद्योग की सहभागिता के साथ चरणबद्ध क्रियान्वयन, कठोर मॉनिटरिंग एवं प्रत्युत्तरदायी सुधार चक्र आवश्यक हैं। निष्कर्षतः, छम्च् 2020 भारत की शिक्षा को वैश्विक मानकों, स्थानीय आवश्यकताओं और सतत विकास लक्ष्यों से जोड़ने की ठोस रूपरेखा देता है; इसकी सफलता संसाधन संरेखण, शिक्षक सशक्तिकरण, और समावेशी, प्रौद्योगिकी-सक्षम कार्यान्वयन पर निर्भर है।
