छपरा नगर के शहरी विस्तार का सामाजिक भूगोलिक विश्लेषण
Published Date: 04-09-2025 Issue: Vol. 1 No. 4 (2025): september - October 2025 Published Paper : Download
सारांश- छपरा नगर का शहरी विस्तार सामाजिक, आर्थिक एवं पर्यावरणीय कारकों की पारस्परिक क्रियाशीलता का परिणाम है। अध्ययन में पाया गया कि नगर का विकास ऐतिहासिक बस्तियों से शुरू होकर आधुनिक आवासीय एवं वाणिज्यिक क्षेत्रों तक विस्तृत हुआ है। जनसंख्या वृद्धि, प्रवास तथा आर्थिक गतिविधियों के विस्तार ने आवासीय संरचनाओं में विविधता उत्पन्न की, जिसमें पारंपरिक ग्रामीण मकानों से लेकर बहुमंजिला इमारतों तक का स्पष्ट संक्रमण दिखाई देता है। जनसंख्या वितरण असमान है, जहाँ केंद्रिक क्षेत्रों में घनत्व अत्यधिक तथा बाहरी क्षेत्रों में तुलनात्मक रूप से कम पाया गया। आर्थिक ढांचा कृषि, व्यापार, लघु उद्योग एवं सेवा क्षेत्र पर आधारित है, जबकि शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सामाजिक सेवाओं की उपलब्धता सामाजिक समावेशन का आधार प्रस्तुत करती है। यातायात, परिवहन, जल प्रबंधन तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसी अवसंरचनाएँ सतत शहरीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। प्राकृतिक संसाधनों के दबाव, भूजल दोहन, भूमि उपयोग परिवर्तन तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों ने पर्यावरण् ाीय जोखिमों को बढ़ाया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि छपरा नगर का सामाजिक-भूगोलिक परिदृश्य विविधता, असमानता एवं पर्यावरणीय चुनौतियों के साथ विकसित हो रहा है, जिसके लिए संतुलित एवं सतत शहरी नियोजन अत्यावश्यक है।
मुख्य शब्द: शहरी विस्तार, सामाजिक भूगोल, जनसंख्या घनत्व, आवासीय संरचना, आर्थिक गतिविधियाँ, अवसंरचना विकास, सतत शहरीकरण।.