तकनीक, समाज, प्रकृति और बाल-मनः क्षमा शर्मा की कहानियों का बहुआयामी अध्ययन
Published Date: 04-09-2025 Issue: Vol. 1 No. 4 (2025): september - October 2025 Published Paper : Download
सारांश- इस शोध-लेख “तकनीक, समाज और संवेदनशील बाल-मनरू क्षमा शर्मा की कहानियों का बहुआयामी अध्ययन” में आधुनिक तकनीकी युग के तीव्र परिवर्तन, उसके सामाजिक प्रभाव तथा बाल मनोविज्ञान पर पड़ने वाले परिणामों का सम्यक् विश्लेषण किया गया है। अध्ययन दर्शाता है कि क्षमा शर्मा की बाल कहानियाँ केवल मनोरंजनात्मक साहित्य नहीं हैं, बल्कि वे बच्चों को संवेदनशील, जागरूक और विचारशील बनाने का गंभीर प्रयास भी करती हैं। उनकी कहानियाँ उस परिवेश को प्रस्तुत करती हैं जहाँ मोबाइल, इंटरनेट और डिजिटल दुनिया बच्चों के जीवन का हिस्सा बन चुकी है, परंतु इन तकनीकी सुविधाओं के बीच भी मानवीय संबंध, पारिवारिक मूल्य, सामाजिक दायित्व और नैतिक चेतना की आवश्यकता बनी रहती है। लेख में स्पष्ट किया गया है कि क्षमा शर्मा तकनीक को नकारती नहीं, बल्कि उसके संतुलित, सकारात्मक और उत्तरदायित्वपूर्ण प्रयोग पर बल देती हैं। उनके यहाँ समाज एक सक्रिय तत्व की तरह मौजूद है, जहाँ परिवार, मित्रता, सहयोग, सहानुभूति, करुणा और सत्य जैसे मूल्य बच्चों के चरित्र-निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। उनकी कहानियों के नायक बालक केवल उपदेश ग्रहण करने वाले पात्र नहीं, बल्कि सोचने-समझने, निर्णय लेने और अनुभव से सीखने वाले जीवंत चरित्र हैं। इस दृष्टि से उनका साहित्य बाल-मन की संवेदनशीलता का सम्मान करता है और आधुनिकता तथा परंपरा के बीच सार्थक संतुलन स्थापित करता है। निष्कर्षतः यह अध्ययन सिद्ध करता है कि क्षमा शर्मा का बाल साहित्य तकनीक, समाज और बाल-चेतना के त्रिकोणीय संबंध को संवेदनात्मक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टि से समृद्ध बनाता है। उनकी कहानियाँ बच्चों को केवल आधुनिक समय से परिचित नहीं करातीं, बल्कि उन्हें मानवीय मूल्यों से जुड़कर तकनीक का सार्थक उपयोग करने की प्रेरणा भी देती हैं। इस प्रकार उनका साहित्य समकालीन बाल साहित्य में अत्यंत प्रासंगिक और उपयोगी सिद्ध होता है।
मुख्य शब्द: क्षमा शर्मा, बाल कहानियाँ, तकनीकी, समाज, बालमन .