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ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण में डिजिटलीकरण का प्रभाव

डॉ0 सुबोध प्रकाश गौतम, असिस्टेन्ट प्रोफेसर, समाजशास्त्र विभाग, बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कुशीनगर (उ0प्र0) DOI: 10.64127/Shodhpith.2026v2i1003 DOI URL: https://doi.org/10.64127/10.64127/Shodhpith.2026v2i1003
Published Date: 10-01-2026 Issue: Vol. 2 No. 1 (2026): January-February 2026 Published Paper PDF: Download

प्रारम्भिक अनुच्छेद- भारतीय ग्रामीण सामाजिक व्यवस्था में महिलाओं की प्रस्थिति पुरुषों की तुलना में कम महत्वपूर्ण नही है। ग्रामीण महिलाएं पुरुषों की तुलना में ज्यादा ही जिम्मेदारियों का निर्वहन करती हैं। वे घरेलू कार्यों को तो करती हैं है, साथ ही साथ पुरुषों से कंधा से कंधा मिलाकर हर क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। लेकिन साथ ही साथ ग्रामीण महिलाओं की स्थिति शहरी महिलाओं की तुलना में बहुत ज्यादा अच्छी नही है। आज का दौर डिजिटल युग का है। जिसे सुगम बनाने में इंटरनेट, टी0वी0 तथा अन्य साधन ने अपना योगदान दे रहे हैं तथा इनका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रभाव हमारे ग्रामीण समाजों पर स्पष्ट रुप से परिलक्षित हो रहा है। डिजिटलीकरण ने जहाँ एक तरफ ग्रामीण महिलाओं को अवसर प्रदान किया है वहीं दूसरी तरफ उनके सामने अनेक चुनौतियां भी खड़ी हो रही हैं। जहाँ तक ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की बात की जाए तो यह नितान्त आवश्यक है। क्योंकि जब तक ग्रामीण महिलाएं सशक्त नहीं होंगी, उन्हें अनेक समस्याओं का सामना करते रहना पड़ेगा। शहरी महिलाएं ग्रामीण महिलाओं की तुलना में ज्यादा सशक्त हैं क्योंकि वे डिजिटलीकरण का भरपूर इस्तेमाल कर रही हैं। वे नित्य नयी जानकारियों को प्राप्त करती रहती हैं जो उनके विकास के लिए आवश्यक है। प्रस्तुत शेाध पत्र में यह बताने का प्रयास किया गया है कि कैसे इंटरनेट, सोशल मीडिया एवं अन्य डिजिटल साधनों के प्रयोग से ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाया जा सकता है। कैसे ग्रामीण समाज में लैंगिक समानता को लाया जा सकता है। स्त्री-पुरुष के बीच जो परम्परागत रुप से कार्य विभाजन है, उसको कैसे दूर किया जा सकता है।

मुख्य शब्द: महिला सशक्तिकरण, डिजिटलीकरण (डिजिटल युग).


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