भामती उपन्यास मे नारी विर्मश
Published Date: 04-09-2025 Issue: Vol. 1 No. 4 (2025): september - October 2025 Published Paper : Download
आरंभिक अनुच्छेद- पद्म श्री डॉ0 उषा किरण खान मैथिली साहित्यमे कथा एवं उपन्यास लए उपस्थित भेलीह। यद्यपि हिनक लेखनक मूल श्रोत हिन्दी रहलनि। मुदा मैथिली मे सेहो कम नहि लिखलनि। दू गोट कथा संग्रहक संगहि पाँच गाटे उपन्यासक रचना कयलनि। डॉ0 खान इतिहासक प्राध्यापिका छलीह। एहि ऐतिहासिक अनुभूति के ओ उपन्यासक रूप मे समाजक समक्ष रखैत छथि। ऐतिहासिक पृष्ठभूिम सँ लिखल हिनक तीन गोट उपन्यास अछि। ‘‘हसीना मंजिल’ (1995) भारत विभाजनक त्रासदी के चित्रित करैत अछि। वासूकी नाथ झा मन्तव्य द्रष्टव्य अछि,- ‘उपन्यास’ हसीना मंजिल’ विशेषताक नव दृष्टान्त प्रस्तुत करैत अछि। एकर कथा वस्तु मिथिलाक जनजीवनक ओहि वर्गक प्रतिनिधित्व करैत अछि जकरा मैथिली साहित्य मे अत्यल्प (लगभग नहिएँ) स्थान भेटलैक अछि। तात्पर्य ई जे एहि मे मिथिलाक मुसलमानक सेहो सामाजिक-आर्थिक दृष्टि सँ विपन्न वर्गक जीवन कथा के ँ सहजता सँ अभिव्यक्त कएल गेलैक अछि। विशेषो मे विशेष ई जे नारी स्वाबलम्बन एवं आत्म विश्वास एहि उपन्यासक कथा सूत्रक आधार अछि। संगहि वातावरणक दृष्टि मे भारत पाकिस्तानक विभाजन तथा पाकिस्तान-बांग्लादेशक विभाजन पृष्ठभूिमक काज करैत अछि। एहि दुनू विभाजनक विषाक्त वातावरणक परिणति के ँ एहि भावुकता प्रधान उपन्यास मे अत्यन्त चतुरता सँ समाहित कएल गेल अछि।