रचनाकार साकेतानंद ओ हुनक सारस्वत-साधना
Published Date: 04-09-2025 Issue: Vol. 1 No. 4 (2025): september - October 2025 Published Paper : Download
आरंभिक अनुच्छेदश- भाषाक माध्यमसँ अन्तर्मन केर अभिव्यक्ति थिक-साहित्य। आइ मानव जीवन उद्वेलित भऽगेल अछि। चारूकात अस्त्र-व्यवस्ताक वातावरण व्याप्त भऽ गेल अछि। साहित्य एक एहेन माध्यम थिक जाहिसँ मनुक्खक समस्त विकासक समस्याकेँ दूर कयल जा सकैत अछि आ भाषा साहित्य संस्कृति सभ्यताक दृष्टिसँ एहि रोगक निवारणार्थ अचूक दवाइ थिक।१ कोनो क्षेत्रक विकासक प्रतिफल ओहि क्षेत्रक बसो-वास, रहन-सहन खान-पान, संस्कृति, सभ्यता, भाषा-साहित्य आदिसँ परिलक्षित होइत अछि। कोनो समाज आ राष्ट्रक अंतिम लक्ष्य सुसम्पन्न, समुन्नत, सुसम्य आ सुसंस्कृते होयब छैक तँ समाज वा राष्ट्रक भाषा संस्कृति सभ्यताकेँ अपन-अपन क्षेत्र सँ संरक्षण प्राप्त करबाक आवश्यकता होइत छैक।२ रचनाकार समाज मध्य रहैत अछि तथा समाजक क्रिया-कलाप, रीति-रेवाज, रहन-सहन, समस्या आदि केँ निकट सँ देखैत रहबाक कारणे ओकरा मन मे प्रतिक्रिया होइत छैक जकरा ओ अपन लेखनीक माध्यमसँ कागज पर अभिव्यक्ति दैत छैक। समाजक पूर्णरूपेण चित्रण करबाक ओ सतत प्रयत्न करैत रहैत अछि। समाज मध्य कतोक तरहक समस्या रहैत छैक। ओहि समस्याकेँ ध्यान में राखि ओकर चित्रण करैत अछि। प्रायरू सभ साहित्यमे ई-बात देखल जाइत अछि। साहित्यक तथा केँ कल्पनाक पुट दऽ ओकरा मनोरंजक अथवा उपयोगी बना कऽ परसबाक प्रयास सेहो कएल जाइत अछि। एहि सँ ओहिमे रोचकता अबैत अछि आ एहि रोचकताक कारणे ओ कृति बेसी पढ़लो जाइत अछि।